Friday, 24 October 2014

बांग्लादेश




बांग्लादेश के साथ

जनसत्ता 28 जून, 2014 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली सक्रियता विदेश नीति के ही मोर्चे पर दिखी, और इसमें उन्होंने पड़ोसी देशों को तरजीह दी। मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में उनके निमंत्रण पर मॉरीशस और सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी शरीक हुए थे। सिर्फ बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना अपनी पूर्व-निर्धारित जापान-यात्रा के कारण नहीं आ सकी थीं, उनकी नुमाइंदगी वहां की संसद की अध्यक्ष ने की थी। लेकिन उस वक्त जो कसर रही, वह विदेशमंत्री सुषमा स्वराज की बांग्लादेश यात्रा ने पूरी कर दी है। यही नहीं, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मसलों पर संवाद का सिलसिला आगे बढ़ा है और कई अंदेशे या कुछ मामलों में संशय की स्थिति दूर करने में मदद मिली है। यों इस अवसर पर कोई खास करार नहीं हुआ। इसलिए कि तीस्ता नदी जल बंटवारे और सीमांकन को लेकर जो समझौते प्रस्तावित हैं, उन पर भारत फिलहाल अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच सका है। बांग्लादेश को काफी समय से इन दोनों मसलों पर भारत की मंजूरी का इंतजार रहा है। वर्ष 2011 में तीस्ता नदी के जल बंटवारे की बाबत यूपीए सरकार समझौते को स्वीकृति देने की दिशा में मंजिल के करीब पहुंच गई थी। पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ढाका दौरे के ऐन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एतराज के चलते कदम वापस खींचने पड़े। शायद उसी अनुभव के मद््देनजर सुषमा स्वराज ने ढाका जाने से पहले ममता बनर्जी से बात की। जहां तक सीमाभूमि समझौते की बात है, इस पर यूपीए सरकार के समय खुद भाजपा ने कई दफा विरोध जताया था। अलबत्ता अब भाजपा सरकार की विदेशमंत्री ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और वहां के विदेशमंत्री अब्दुल हसन महमूद अली से हुई बातचीत में तीस्ता के अलावा सीमांकन समझौते की भी अड़चनें दूर होने का भरोसा दिलाया है। शेख हसीना के पिछले कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध और बेहतर बनाने की दिशा में काफी कुछ हुआ था। बांग्लादेश के सहयोगी रुख के फलस्वरूप भारत को पूर्वोत्तर में उल्फा केआतंकवाद से निपटने में मदद मिली। कोलकाता से ढाका के बीच मैत्री एक्सप्रेस शुरू हुई और भारत के बाजार में बांग्लादेश के लिए पहुंच बनाना आसान हुआ। इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए सुषमा स्वराज ने मैत्री एक्सप्रेस में वातानुकूलित बोगियां और इस ट्रेन के फेरे बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। दोनों देशों के बीच नागरिकों के स्तर पर संपर्क और आवाजाही को आसान बनाने के क्रम में वीजा-नियमों को कुछ उदार बनाने का करार हुआ। अब तेरह साल से क म और पैंसठ साल से अधिक आयु के बांग्लादेश के नागरिकों को भारत एक साल के बजाय पांच साल के लिए बहु-प्रवेश वीजा देगा। भारत ने बांग्लादेश को त्रिपुरा के पालाताना के गैस आधारित बिजली संयंत्र से सौ मेगावाट अतिरिक्त बिजली और लघु विकास परियोजनाओं के लिए साठ करोड़ रुपए का अनुदान देने की घोषणा की है। अगर नदी जल बंटवारे के विवाद सुलझ जाएं तो जलविद्युत परियोजनाओं में भी सहयोग का रास्ता खुल जाएगा। मोदी ने सुषमा स्वराज के जरिए शेख हसीना को भारत आने का न्योता दिया और शेख हसीना ने मोदी को बांग्लादेश आने का। दोनों नेताओं ने एक दूसरे का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। शेख हसीना ने पिछले साल दिल्ली की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद््द कर दी थी, क्योंकि तीस्ता समझौते पर भारत के औपचारिक निर्णय की उम्मीद उन्हें नहीं दिख रही थी। इसलिए शेख हसीना दिल्ली कब आएंगी या मोदी ढाका कब जाएंगे, यह बहुत कुछ तीस्ता और सीमांकन संबंधी प्रस्तावित समझौतों की प्रगति पर निर्भर करता है।

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